मंगलवार, जून 22, 2021

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मदर्स डे पर हरिद्वार की इस माँ को हमारा सलाम… स्पेशल स्टोरी माँ की कड़ी मेहनत और हौसलों ने बेटी को बनाया IAS अफसर

उत्तराखंड।।

माँ की कड़ी मेहनत और बेटी की लगन लाई रंग।।

पढ़ाई करने के अपने अधूरे सपने को एक माँ ने किया पूरा।।

बेटी को IAS बना कर ही माँ ने लिया दम।।

हम बात कर रहें है उत्तराखंड की IAS महिला अफसर अनुराधा पाल की।।

अनुराधा पाल 2016 बैच की IAS अफसर है जो वर्तमान में पिथौरागढ़ में CDO के पद पर तैनात है इससे पहले वो देहरादून में बतौर सिटी मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी संभाल रही थी जबकि IAS बनने के बाद सबसे पहली पोस्टिंग उन्हें SDM टिहरी की मिली थी आपको बता दें कि अनुराधा पाल हरिद्वार के औरंगाबाद की रहने वाली है जो बहुत ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है पिता सतीश घर घर जाकर दूध बेचा करते थे तो माँ मिथलेश गाँव में लोगों के खेतों में मजदूरी किया करती थी अनुराधा का बचपन इतनी गरीबी से गुजरा है कि आज भी जब वो अपना बचपन याद करती है तो उनकी आंखों से आँसू बहने लगते है सलाम है उस माँ को जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी कठिन और कड़ी मेहनत करने से हार नही मानी और अपनी बेटी अनुराधा को इस मुकाम तक पहुंचा दिया

IAS बनने तक अनुराधा पाल का सफर-

अनुराधा ने नवोदय विधायल से इंटर तक कि पढ़ाई की जिसके बाद वो पढ़ाई के लिए दिल्ली चली गई जहाँ न केवल अनुराधा ने अपनी पढ़ाई की बल्कि अपनी पढ़ाई के खर्चो को पूरा करने के लिए दूसरे छात्रों को भी पढ़ाया …वही अनुराधा की मेहनत और लगन रंग लाई 2013 में UPSC की परीक्षा दी जिसमें उनका सिलेक्शन IRS IT में हो गया…परिवार की आर्थिक हालात देखते हुए अनुराधा ने देहरादून इनकमटैक्स में असिस्टेंट कमिश्नर की जिम्मेदारी संभाल ली… लेकिन अनुराधा वही नही रुकी नौकरी के साथ साथ वो IAS की तैयारी भी करती रही 2015 में उनकी शादी हो गई और उन्होंने IAS का एग्जाम भी पास कर लिया जिसके बाद वो 2016 बैच की IAS बन गई… ये सब सुनने और पढ़ने में बहुत साधरण से लगता है लेकिन स्कूल की पढ़ाई से IAS बनने तक का सफर अनुराधा के लिए काँटो की राह पर चलने से कम नही था.. जहाँ एक तरफ घर की माली हालत बेहद खराब थी तो दूसरी तरफ अनुराधा को लेकर आस पड़ोस और जान पहचान वालों ने भी(लड़की को इतना पढ़ा लिखा कर किया करोगे, दूसरे घर में जाकर चौका बर्तन ही तो करना है) बोलने में कोई कसर नही छोड़ी लेकिन माँ मिथलेश ने किसी की बात पर ध्यान नही दिया क्योंकि उनका लक्ष्य तो अपने बच्चों का उज्वल भविष्य बनाना था माँ के इन हौसलों के पीछे माँ मिथलेश का अपना बचपन भी है जो ऐसे हालातों से गुजरा था कि वो नही चाहती थी कि उनकी बेटी को भी वही सब झेलना पड़े जो उन्होंने सहा है
लेकिन आज वो माँ अपनी बेटी को IAS बना देख बेहद खुश है जो सब उस माँ ने बर्दास्त किया झेला और मुश्किलों में रहीं उन सभी पीड़ाओं को खुशी के आंसुओ से धूल दिया है इतना ही नही बेटी के IAS बनने के बाद भी माँ और पिता आत्मनिर्भर हो कर अपना जीवन यापन कर रहे है

 

 

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